Saturday, 26 September 2015

कर्म नगरी को मेरा प्रणाम ...........










इस  कर्म नगरी में
कर्मों की सही परिभाषा और पैमाने समझना मुश्किल है,
चेहरे बेहिसाब हैं , नकाब भी चढ़े हैं
सुन्दर चेहरा भी कर्म नगरी को गन्दा कर रहा है
और कुछ बिगड़ी सी शक्लें सुधारने की कोशिश
आत्मा और मन के अन्धकार में सुन्दर चेहरे कि पहचान उसके कर्म हैं
अब मैं और आप इसे कैसे पहचाने
कर्म नगरी को कैसे निखारें
इसी प्रयास कि अभिव्यक्ती को मन से मेरे संग चले निभाएं
इस नगरी को संस्कारधानी को फिर हम मिल कर बनाएं !!

!!!!!!!! सौरभ जयसवाल !!!!!!!!!!!
भाजपा युवा मोर्चा
जबलपुर



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